तालिबान क्या है? (Taliban 2.0)जानिए तालिबान का इतिहास, उत्थान और पतन

नमस्कार दोस्तों, अफगानिस्तान एक खतरनाक स्तिति से जूझ रहा है। पूरा दक्षिण एशिया इसके लिए खतरे में आ गया है। तालिबान ने अब चुनी हुई सरकार को हटाकर अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। आज, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगानिस्तान को सत्ता और भाग्य सौंप दिया है, एक ऐसा संगठन जिसने 20 साल से भी कम समय पहले युद्ध की घोषणा की और सैन्य कार्रवाई के माध्यम से नष्ट कर दिया। अमेरिका ने तालिबान के साथ दुश्मन-संबद्ध क्षेत्रों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है। यह भी बताया जाता है की इस संगठन के निर्माण में अमेरिका का हाथ है।  संयुक्त राज्य अमेरिका ने तालिबान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे पाकिस्तान और सऊदी अरब के प्रत्यक्ष संरक्षण में उठाया गया है।


तो आज हमने गहरी रिसर्च कर के तालिबान की एक सविशेष इतिहास प्रस्तुत किया है। इस पोस्ट में हमने बताया है की  तालिबान क्या है ? तालिबान का इतिहास, उत्थान और पतन, तो को अंतिम तक जरूर पढ़ें।

तालिबान क्या है (Taliban Kya Hai)? और तलिवान का उत्थान कैसे हुआ?

Taliban

1979 दशक में अफगानिस्तान के साम्यवादी सरकार के समर्थन में सोवियत सेना जो अब रसिया है, वो काबुल में प्रवेश करता है। रसिया का अफगानिस्तान के साम्यवादी सरकार का समर्थन दे कर अफगानिस्तान में आपका दबदबा बनाना चाहता था। 

रसिया के अफगानिस्तान में प्रवेश के बात अमरीका को खटका। वो भी चाहता था की अफगानिस्तान में उसका दबदबा रहे। इस लिए अमेरिका ने खेल खेलना शुरू किया। संयुक्त राज्य अमरिका, पाकिस्तान, चीन और सऊदी अरब सभी सोवियत संघ की कार्रवाइयों से निपटने के लिए हात मिलाया और सेना में एक जुट शामिल हो गए। अमरीका ने सोवियत सेना से लड़ने के लिए अफगानिस्तान में मुजाहिदीन का गठन किया गया था। अमरीका चीन ,पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मुजाहिदीन से निपटने में विफल हो गया और उसके बाद सोवियत संघ ने 1989 में अपने सैनिकों को वापस ले लिया। सोवियत समर्थित सरकार के पतन के बाद, 60 मुजाहिदीन समूहों ने एक गठबंधन सरकार बनाई, लेकिन उनके आपस में ही झगड़ा सुरु हुआ और देश में नागरिक संघर्ष और गृह युद्ध छिड़ गया। 

मुजाहिदीन और गृह युद्ध को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद, पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी, ISI ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर विभिन्न मदरसों से छात्रों की भर्ती शुरू कर दी थी जो बाद में तालिबान का आख्या पाया। तालिबान का मतलब है छात्र समूह। इस संगठन का नेतृत्व मुल्ला उमरी ने किया था तालिबान के नेतृत्व वाले समूह ने 1994 को कंधार पर हमला किया और दखल में लिया। पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्ण समर्थन के साथ, तालिबान उनकी मदद और स्थानीय लोगों के समर्थन से दो साल के भीतर राजधानी काबुल पर कब्जा करने में सक्षम रहा।  

 

मुजाहिदीन सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद 1996 में तालिबान सरकार का गठन किया गया था और इसका नेतृत्व पाकिस्तान के मुल्ला उमर। पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के अलावा किसी भी देश ने तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है।  हालांकि, पाकिस्तान के जरिए अमेरिका खामोशी से तालिबान को समर्थन करता रहा। 

 

तालिबान का पतन कैसे हुआ ?

9 सितंबर, 2001 (9/11) को न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले ने अफगानिस्तान का इतिहास बदल दिया। हमले में 3,000 लोगों की मौत हो गई थी और कई हजार और घायल हुए थे। उस दिल दहला देने वाला हमला के लिए अमेरिका ने अल-कायदा नामक एक आतंकवादी संगठन को दोषी ठहराया और उस आतंकवादी संगठन को नष्ट करने की कसम खाई। 

 

अमेरिका को खबर मिल की उस समय अलकायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के साथ संगठन के कई प्रमुख आतंकवादी नेता अफगानिस्तान में शरण लिए हुए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने तालिबान सरकार से उन्हें तुरंत रिहा करने और उन्हें आतंकवादी घोषित करने का आह्वान किया लेकिन तालिबान सरकार ने अमेरिका की आह्वान को ठुकरा दिया। इसके कारण अमेरिका ने तालिबान सरकार के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और तालिबान के सत्ता केंद्रों और सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला शुरू किया। अमेरिका के इस जोरदार हमले से तालिबान के हजारों सैनिकों और नेता की मौत हो गई।  मुल्ला उमरी समेत कई नेता पाकिस्तान भाग गए और वहीं आश्रय ले लिए। 

अमेरिका के तालिबान के खिलाफ युद्द के चलते दिसंबर में तालिबान सरकार गिर गई, और अमेरिका समर्थित हामिद करजई ने पदभार संभाला। तालिबान सरकार के पतन के बावजूद, इसके सैन्य गुट विभिन्न स्थानों पर अफगान सेना और अमेरिकी सेना के साथ संघर्ष करते रहे। यह सिलसिला लगभग 14 साल का चला। लाखो सैनिकों अफगानिस्तान में तैनात हो कर तालिबान से युद्ध करते रहे। 

तलिवान का पुनः उत्थान कैसे हुआ? Taliban 2.0

फिर कई साल के युद्ध के बाद जब महसूस हुआ कि स्थिति शांत हो रही है, अमेरिका ने 2014 में घोषणा की कि वह अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस लेने के निर्णय लिया है। अमेरिका के इस निर्णय से उत्साहित हो कर तालिबान ने फिर से अफगानिस्तान पर आतंकी फैलाना सुरू कर दिया और धीरे धीरे भिन्न भिन्न जगह भी दखल करना सुरू किया। तालिबान की इस हरकत से अमेरिका तालिबान में स्थित अमरीकी सेना और नागरिकों के सुरक्षा पर चिंतित हो गया।

तालिबान की इस हरकत के चलते शांति और अमन  के लिए फरवरी 2020 में कतर के दोहा में तालिबान और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ। समझोत में यह तय हुआ की तालिबान अमेरिकी सेना पर किसी भी प्रकार से हमला नहीं करेगी और अल कायदा पीआई जैसे किसी भी आतंकवादी संगठन के साथ संपर्क नहीं रखेगा। पर इस समझोता में यह गड़बड़ हुआ की इस पूरी प्रक्रिया में अफगान सरकार शामिल नहीं थी। उस समझोता में अफगान सरकार के साथ सत्ता के बंटवारे का भी कोई जिक्र नहीं था। जिसका दुष्परिणाम स्वरूप आज देखा जा सकता को अमेरिका की घोषणा के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के कुछ ही वक्त में पूरे देश को कब्जे में ले गए।

20 साल से अमेरिका से हथियार और ट्रेनिंग ले रही अफगान सेना आज हार कर आत्मसमर्पण कर चुकी है और देश के राष्ट्रपति अपने पद से इस्तीफा दे कर विदेश भाग चुके हैं। तालिबान, ने 15 अगस्त को राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया, और अभी पूरा देश तालिबानी कब्जे में है। 

तालिबान 2.0 क्या है ? क्या नई तालिबान सरकार पिछले से थोड़ा ज्यादा नर्म पेश आयेगी ?

यह साफ साफ दिखा है को पुराने तालिबान को 1996 से 2000 दशक तक सरकार में था वो बहत शक्त सरकार था जो कई सारे कड़ी नियमों में अफगानिस्तान देश को प्रताड़ित करता था। खास कर के महिलाओं के नियम काफी शक्त थी और नियम खिलाफ जो करता था उसे बीच सड़क पर हत्या जैसे कठोर दण्ड तक भी दिया जाता था। एक धार्मिक अंधापन से बने वह सरकार जनता को प्रताड़ित करने के अलावा कुछ और नहीं करता था। 

 

पर क्या 20 साल के एक बड़ी व्यवधान के बाद बना यह नई तालिबान सरकार पिछले के अलावा बदला है ? क्या ये नई सरकार का नियम महिलाओं के लिए अनुकूल है ? यह तो बाद में पता चलेगा।

 

16 अगस्त को तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने तालिबान का नई सरकार आने के बाद सर्वप्रथम प्रेस कांफ्रेंस रखा और उसमे नई सरकार की कुछ झलक दिखाया जिससे नई तालिबान सरकार का अभिमुख्य और नियमों का कुछ आभास मिलता है। 

अपने प्रेस कांफ्रेंस में मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा की यह नई तालिबान सरकार तालिबान 2.0 एक शांतिवादी और मिलापी सरकार होगा जिसमे कोई भी प्रकार के कठोर दंड या मृत्य दंड नहीं दिया जायेगा। 

 

जबीहुल्ला मुजाहिद ने मुख्य तौर पर 3 मुद्दों पे बात किया और उसमे नई सरकार का अभिमुख्या रखा। 

  1. कोई भी प्रतिशोध नही लिया जाएगा।
  2. महिलाओं के अधिकार 
  3. नई सरकार की विदेश नीति

 

प्रवक्ता ने इन 3 मुद्दों के ऊपर क्या बात किया आइए संक्षिप्त में जानते हैं। 

  • कोई भी प्रतिशोध नही लिया जाएगा:

प्रवक्ता ने ये स्पष्ट किया है की नई सरकार पूर्व सैनिकों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार से बदला नहीं लेगा। और जो पहले की सरकार के लिए जासूस और ठेकेदारी जैसे काम करते थे उनको भी माफी दिया जायेगा। प्रवक्ता ने यह कहा की “विपक्ष पक्ष की ए से जेड तक सभी गलती माफ किया जाता है। हम बदला नहीं लेंगे”। 

  • महिलाओं के अधिकार:

पीछले सरकार को महिलाओं के ऊपर अत्याचार के वजह से काफी बदनाम होना पड़ा था पर यह नई सरकार महिलाओं के लिए थोड़ा नर्म है यह प्रवक्ता के अभिमुख्य से आभास मिलता है। 

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है की इस नई सरकार में महिलाओं को भी पढ़ने का और काम करने का स्वाधीनता मिलेगा। पर महिला अपनी स्वाधीनता सरिया कानून और इस्लामिक मर्यादा के दायरे में ही पाएंगे। 

  • विदेश नीति

प्रवक्ता ने यह कहा है की तालिबान अब वो पुरानी गलती नही दोहोराएगी जो उसने पहले की सरकार में किया था। वो और ऐसा कोई काम नहीं करेगा जो विवाद या कोई भी युद्ध को प्रोत्साहित करता हो। अब अफिंस्तान को कोई रण भूमि की तरह इस्तेमाल नहीं होने देंगे, यह प्रवक्ता का कहना है।

तालिबान का यह अभिमुख्य तो अभी ठीक ठाक लग रहा है पर आगे भविष्य में इसका क्या परिणाम घटेगा यह सिर्फ समय चक्र पर निर्भर है। 

तालिबान क्या चाहता है ?

अब ये बात शायद किसी से नहीं छिपा की तालिबान समेत कई भी इस्लामिक दल हमेशा एक ही चीज चाहता है वो है है पूरी दुनिया में इस्लाम की आतंकी फैलाना। उनका उद्देश्य ये है की पृथ्वी के सभी देशों में इस्लाम की सरिया कानून लगे। इस उद्देश्य से हमेशा से मुस्लिमो के तरफ से अशांति और आतंकी चल रहा है पूरी दुनिया में। 

और अगर तालिबान की बात करें तो इस संगठन का गठन ही अफगानिस्तान पर इस्लामिक सरकार बनाने के लिए हुआ था। और कुछ साल तक सरकार बनाया भी। पर 20 साल को इस अवधि में भी तालिबान की कार्यकर्ता अपने उद्देश्य को नही भूले और पहले से ज्यादा शक्तिशाली बन कर उभरे हैं और अफगानिस्तान को कब्जा किए हैं। 

तालिबान चाहे जितने भी बाते बनाए और अपनी छवि सुधारने की कोशिश करे वो हमेशा के लिए ही एक आतंकवादी संगठन रहेगा जो एक हसती खेलती उभरती देश को बरवाद कर के रख चुका है। और तालिबान का उभरने के साथ साथ भारत में भी खतरा मंडरा रहा है। अब पता नही किस किस प्रकार की विपत्ति भारत में आयेगा। 

सरकार नई या पुरानी, एक आतंकवादी संगठन आखिर में आतंक ही फैलाएगा यह तय है। 

 

FAQs

तालिबान संगठन क्या है?

अफगानिस्तान का तालिबान एक इस्लामिक राजनैतिक संगठन है जिसका शासन व्यवस्था इस्लामिक सरिया कानून को अनुसरण करता है और आतंकी फैलता है।

तालिबान की राज में राष्ट्रपति का भार कौन संभालेगा?

इस नई तालिबान की सरकार में हमीद करजई राष्ट्रपति का भार संभालेगा।

तालिबान का अर्थ क्या है?

तालिबान का अर्थ है “छात्रों का एक दल”। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की मदरसों से चुने हुए छात्रों को एक दल को ले कर एक राजनैतिक आतंकी संगठन बनाया गया था इस लिए इसका नाम तालिबान रखा गया।

क्या तालिबान एक देश है?

तालिबान एक अफगानी संगठन है जो अभी अफगानिस्तान देश में शक्रिया है।

अंतिम बात

इन सब घटनावली से यह डराने वाले है की 21वीं शताब्दी में भी किसी देश का जबरदस्ती कब्जा हो सकता है और इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि दोहा समझौते में लोकतंत्र, मानवाधिकार, आतंकवाद, धार्मिक कट्टरवाद और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अमेरिका के कुछ खास दृष्टिकोण परिलक्षित नहीं होता है। मानवाधिकारों और धार्मिक कट्टरवाद के मामले में तालिबान का रिकॉर्ड खराब है, जिससे क्षेत्र में अशांति फैल सकती है यह तय है। तालिबान को जिससे सबसे ज्यादा खतरा है वो है हमारा देश भारत। भारत एक का अवस्था ऐसे हो गया को ऊपर की दोनो तरफ से खतरा आ गया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तालिबान अब एक तरफ से हमला करेंगे और बाकी के तरफ से चीन सर दर्द देगा। उम्मीद है की UN अथवा जाति संघ जरूर कुछ ठोस कदम लेगा और भारत समेत पूरे विश्व को आशंकी तालिबान के खतरे से आश्वस्त करेगा। 


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