भारत में हरित क्रान्ति क्या है? हरित क्रान्ति के जनक कौन है?

काफी कम लोग हरित क्रांति के बारे में जानते है, आज हम इसी विषय में चर्चा करेंगे। हरित क्रांति क्या है और यह कब शुरू हुआ। हरीत क्रांति की पूरी जानकारी के लिए इसे पूरा अच्छे से और विस्तार से पढ़े।

हरित क्रांति क्या है?

पहली हरित क्रान्ति भारत में 1960 के दशक में प्रारम्भ हुई जिसका उदेश्य भारत के कृषि उत्पादन में वृद्धि करके भारत को खाघान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। हरित क्रान्ति शब्द का प्रयोग 1940 और 1960 के समयकाल में विकासशील देशो में कृषि क्षेत्र में किया गया था. सिंचाई के लिए आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था, कुत्रिम खाद एवं विकसित किट नाशक तथा बिज से लेकर अंतिम उत्पाद तक विभिन्न नवीनतम उपकरण व मशीनों की व्यवस्था, हरित क्रान्ति का ही परिणाम माना जाता है।

हरित क्रान्ति के जनक:

नॉर्मन अन्रेस्ट बोरलौग को हरित क्रान्ति का जनक कहा जाता है.यह एक अमेरिकी कृषिविज्ञानी और नोबल पुरस्कार विजेता थे। नॉर्मन उन व्यक्तियों में मशहूर है, जिन्हें नोबल शान्ति पुरस्कार, स्वतंत्रता का राष्ट्रपति पदक और कांग्रेस के गोल्ड मोडल प्रदान किया गया था।

हरित क्रान्ति_Norman_Borlaug

भारत में हरित क्रान्ति के जनक:

डॉक्टर एम.एस. स्वामीनाथन भारत के मशहूर कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रान्ति के जनक है.इन्होने 1966 इसवी में गेहूं की एक संकर बिज विकसित किये जो मेक्स को के बीजो को पंजाब घरेलू किस्म के बीजो के साथ मिश्रण में तैयार किये थे। डॉक्टर एम्.एस.स्वामीनाथन के अनुसार भारत के कृषि केवल अनाज उत्पादन की मशीन नही है, बल्कि देश की बड़ी आबादी के लिए रीढ़ की हड्डी है। वर्ष 1972 में इन्हें विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा पद्भुष्ण से सम्मलित किया गया था।

कृषि शिक्षा तथा अनुसधान:

सरकार द्वारा कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पंतनगर में प्रथम कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, जिसके बाद कृषि से सम्बन्धित उच्च शिक्षा के लिए 4 कृषि विश्वविद्यालय,39 राज्य कृषि,विश्वविद्यालय और इंफोल में एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। 53 केन्द्रीय संस्थान, 32 राष्ट्रीय अनुसंथान केंद्र, 12 परियोजन निर्देशालय, 64 आखिल भारतीय अनुसंधान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा लागू किये गए. साथ ही देश 527 कृषि विज्ञान केंद्र है, जो की कृषि शिक्षा एवं प्रशिक्ष्ण में शिक्षण का कार्य कर रहे है।

हरित क्रांति के चरण:

भारत में पहला चरण हरित क्रांति का प्रारम्भ पंजाब, हरियाणा, पुश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान के गंगानगर आदि क्षेत्रो में हुआ, इसका पहला चरण 1966-67 से 1980-81 तक माना जाता है।

हरित क्रान्ति का दूसरा चरण 1980-81 से 1996-97 तक माना जाता है, जिसमे नवीन तकनीको एवं भारी मशीनों पर विशेष जोर दिया गया।

हरित क्रांति की विशेषताएं:

  • कम कृषि जोत में अधिक से अधिक फसल का उत्पादन होने लगा, जिससे बढती आबादी की कम भूमि भोजन उपलब्ध कराना आसान हुआ।
  • उवर्रको के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई।
  • कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से फसल पर आने वाले कीड़े को नष्ट कर फसल का अच्छा विकास हुआ।
  • सिंचाई परियोजना के विकास से लघु एवं माध्यम किसान भी सिंचाई का पूरा लाभ ले पा रहे है।
  • कृषि समर्धन मूल्य निर्धारण से किसानो की आय में वृद्धि की एक नई आशा का विकास हुआ है।
  • किसान को फसल उपजाने के लिए बैंको द्वारा ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है. साथ ही साथ सरकार द्वारा कृषि योजना भी लागू की जा रही है।

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भारतीय कृषि में सुधार:

हरित क्रान्ति के माध्यम से कृषि क्षेत्र में तकनिकी एवं सुधार करने हेतु बहुत से क्षेत्रो में कार्य किया गया, जिसके बाद अच्छी और चौकने वाले परिणाम भी देखने को मिले, इसके परिणाम कुछ इस प्रकार है:

उन्नतशील बीजो का अधिक इस्तमाल:

कृषि उपज को बढाने के लिए देश में अधिक उपज देने वाले उन्नतशील बीजो का उपयोग होने लगा, इसके अलावा नई नई किस्मो की खोज भी होने लगी।

सिंचाई:

नई विकास निति के अनुसार देश में सिंचाई तकनीक का भी तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 1951 में देशो की कुल सिंचाई क्षमता २२३ लाख हेक्टेयर थी, हरित क्रान्ति के बाद से 2008-09 में बढकर 1,073 लाख हेक्टेयर हो गई है।

बहुफसली उत्पादन:

इसे मल्टी क्रॉप प्रोडक्शन भी कहते है, इस कार्यक्रम में एक भूमि पर एक से अधिक बार फसल का उत्पादन करना होता है. आसान भाषा में ये कह सकते है की भूमि की उपजाऊ शक्ति को खराब किये बिना भूमि क्षेत्र में अधिक उत्पादन करना ही बहुफसली कार्यक्रम के अंतगर्त आता है। 1966-67 में बहुफसली कार्यक्रम लागू किया गया था। जो की भारत में वर्तमान समय में 71 प्रतिशत संचित भूमि पर कार्यक्रम लागू है।

पौधा संरक्षण:

पौधा संरक्षण पर भी विशेष ध्यान किया गया है। इसके उपरान्त खरपतवार व किटो का नाश करने के लिए दवा का छिडकाव किया जाने लगा। वर्तमान समय में समोकित कृषि प्रबंध के अंतगर्त परिस्थति अनुकूल कृषि नियन्त्रण का कार्य भी लागू किया गया।

निष्कर्ष:

हरित क्रान्ति नई कृषि के विकास में आधुनिक कृषि उपकरणों का बहुत अधिक योगदान रहा है। आधुनिक उपकरण जैसे: ट्रेक्टर,थ्रेसर,हार्वेस्टर,बुलडोजर,तथा डीजल व बिजली से चलने वाले पुम्प्सेट आदि। जिससे कृषि के क्षेत्र में उत्पादक में कई गुना वृद्धि हुई है।

 

FAQ:

भारत में हरित क्रान्ति लाने में किसका योगदान था?

भारत में हरित क्रान्ति लाने में एम.के.स्वामीनाथन। योगदान था?

हरित क्रान्ति के जनक कोन है?

हरित क्रान्ति के जनक नौर्मन बोर्लौग। है

भारत में कोन कोन सी क्रान्तिया है?

हरित क्रांति,पिली क्रान्ति,श्वेत क्रान्ति,नीली क्रान्ति, आदि जैसे अनेक क्रांति की शुरुआत भारत में हुयी।

हरित क्रांति का क्या उद्देश्य है?

कृषि उत्पादन में सुधार लाकर फसलो के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना।

हरित क्रान्ति की शुरुआत कब हुई?

हरित क्रान्ति की शुरुआत 1966-1967 में हुई

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