जीएसटी कितने प्रकार के होते हैं, जीएसटी की आवश्यकता क्या है, कितना कारोबार जीएसटी पंजीकरण के लिए आवश्यक होता है

GST आने से पहले अलग अलग राज्यो में अलग अलग कर(TAX) लिया जाता था इस कारण कोई वस्तु एक राज्य में महंगी और एक राज्य में सस्ती होती थी। इस कारण किसी एक राज्य का बहुत विकास हो जाता है, और एक राज्य पिछड़ा रह जाता है। GST आने के बाद पूरे देश में एक तरह का कर लगाया जाएगा। तो आइये जानते हैं की जीएसटी कितने प्रकार के होते हैं, जीएसटी की आवश्यकता क्या है, कितना कारोबार जीएसटी पंजीकरण के लिए आवश्यक होता है और जीएसटी से जुडी पूरी जानकारी।

GST क्या है?

GST का पूरा नाम वस्तु और सेवा कर(Goods and Services Tax) है। जीएसटी से पहले कई प्रकार के टैक्स लिए जाते थे। जैसे की डायरेक्ट टैक्स जिसके अंदर इनकम टैक्स, कॉर्पोरेशन टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, गिफ्ट टैक्स, वैल्थ टैक्स आदि ये सब आते थे(ये अभी भी है) और इनडायरेक्ट टैक्स जिसके अंदर कस्टम ड्यूटी टैक्स, एक्साइज टैक्स, सर्विस टैक्स, सेल्स टैक्स आदि इस प्रकार के कुल 17 टैक्स होते थे इन सब टैक्स को मिलाकर GST बना दिया गया।

जीएसटी कितने प्रकार के होते हैं? Types of GST in Hindi

जीएसटी चार प्रकार के होते हैं जैसे की – 

  • CGST
  • SGST
  • UGST या UTGST
  • IGST

आइये जानते हैं इन GST के बारे में विस्तार से –

C-GST

इसका पूरा नाम सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (केंद्रीय वस्तु और सेवा कर) है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि ये कर केंद्रीय सरकार द्वारा लिया जाता है। इस प्रकार का कर प्रत्येक राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश में लगता है। जैसे कि अगर कोई वस्तु राजस्थान में 5000रूपए की आती है तो उस पर 18% की GST लगती है। तो ये 9% राजस्थान को मिलेगी और 9% केंद्रीय सरकार को मिलेगी।

S-GST 

इसका पूरा नाम स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स(राज्य वस्तु और सेवा कर) है। इस तरह की GST एक राज्य द्वारा ली जाती है। ये एक राज्य के भीतर लगता है। मान लीजिए कोई वस्तु पंजाब में 5000रूपए आती है तो उस पर 18% का कर लगता है।तो इसमें से 9%GST पंजाब द्वारा लिया जाएगा और 9% केंद्रीय सरकार द्वारा लिया जाएगा। उस वस्तु की कीमत 5900रूपए हो जाती है तो 900 के कर में से 450रूपए पंजाब ओर 450रूपए केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा।

UT- GST

इसका पूरा नाम यूनियन टेरिटरी गुड्स एंड सर्विस टैक्स( केंद्र शासित प्रदेश वस्तु और सेवा कर) है। इस प्रकार का कर केंद्र शासित प्रदेशों द्वार लिया जाता है। मान लीजिए कि कोई वस्तु दिल्ली में 5000रूपए में बिकने आई अब दिल्ली सरकार द्वारा इस पर 18% का कर लगाया जाएगा उसमे से 9% दिल्ली सरकार द्वारा और 9% केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। इसकी कीमत 5900 रूपए हो जाएगी इसमें से 450रूपए  केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा और 450 रूपए दिल्ली सरकार द्वारा लिया जाएगा।

I-GST

इसका पूरा नाम इंटेगर्टेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स(समन्वित वस्तु और सेवा कर) है। इस प्रकार की GST अंतर राज्य व्यापार पर लगाई जाती है। मान लीजिए कि कोई वस्तु मध्य प्रदेश से बनकर आती है लेकिन वो उत्तर प्रदेश में बेची जाती है। तो इस वस्तु पर  18% का कर लगाया जाता है। जिस में से 9% उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा और 9% केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। इस प्रकार की GST में उस राज्य को हिस्सा नहीं मिलता है जिस राज्य से वस्तु बनकर आती है उस राज्य को रोजगार मिलता है ये उस राज्य के लिए लाभ की बात है।

कितना कारोबार जीएसटी पंजीकरण के लिए आवश्यक है?

वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के अनुसार, कोई भी व्यवसाय जिसका टर्नओवर रु.40 लाख या उससे अधिक हो तो उसको जीएसटी के लिए पंजीकरण करना होगा। उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी राज्यों के लिए, जीएसटी पंजीकरण के लिए टर्नओवर सीमा रु.10 लाख है।

GST की क्या आवश्यकता थी?

GST आने से पहले हर राज्य में अलग-अलग तरह से टैक्स लिया जाता था, एक ही वस्तु का मूल्य एक राज्य में महंगा होता था तो दूसरे राज्य में सस्ता। कर प्रणाली बहुत ही अव्यवस्थित थी, इसलिए जीएसटी की आवश्यकता महसूस की गई और पूरे देश में एक समान कर प्रणाली को लागू किया गया। जीएसटी को कहा जाता है “एक देश एक कर”( वन नेशन वन टैक्स)।

GST किन-किन लोगो को देना होगा?

  • जिनका सालाना लेन देन 20 लाख होता है।
  • एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार करने पर
  • ऑनलाइन व्यापार

जीएसटी रिटर्न क्या होता है?

GST रिटर्नेड एक प्रकार का दस्तावेज होता है जिसमें टैक्स भरने वाले( मतलब की व्यापारी को )अपनी इनकम डिटेल्स देनी होती है यह इनकम डिटेल्स टैक्स एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी  के द्वारा ली जाती है।ये निम्न प्रकार की होती हैं

  • GST R1
  • GST R 2
  • GST R 2a
  • GST R 3b
  • GST R 4
  • GST R 9

जीएसटी की विशेषताएं क्या है?

  • जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है।
  • ये लगभग समस्त माल और सेवाओं पर लगाया जाता है( पेट्रोल शराब घरेलू उपयोग की वस्तुओं को छोड़ कर के)
  • यह गंतव्य  आधारित उपभोग कर है।
  • यह आयात को अंतर राज्य आपूर्ति मानना
  • निर्यात को शून्य दर वाली आपूर्ति मानना।

GST स्लैब क्या है?

GST स्लैब का मतलब है कि  प्रत्येक वस्तु  पर कितना GST लगाया जाएगा। जैसे कि 

  • 0%- दूध,खेती से संबधित वस्तुएं
  • 5%- चीनी,अख़बार, कॉफी,  कोयला आदि
  • 12%- बटर,मोबाइल,जूस आदि
  • 18%- हेयर ऑयल,आयरन ,क्रीम, स्टील आदि
  • 28%- शैंपू , मेक अप,परफ्यूम आदि
  • पेट्रोल,शराब,गेस, इलेक्ट्रिक बिल को GST से बाहर रखा गया है।

GST आईडेंटिफिकेशन नंबर क्या है?

ये 15 अंक का नंबर होता है जिसमें शरूआत के 2अंक राज्य से सम्बन्धित होते है ,ओर  बीच के 10नंबर पेन कार्ड के नंबर होते है लास्ट 3 अंक विशेष नंबर होते है।  

GSTN ( GST नेटवर्क) द्वारा ये नंबर 1 हफ्ते में दे दिया जाता है।

  • आधार कार्ड नंबर
  • पैन कार्ड नंबर
  • मोबाइल नंबर
  • ईमेल
  • रेंट एग्रीमेंट
  • पासवर्ड साइज फोटो
  • कैंसिल चेक

इन दस्तावेजों से आप ऑनलाइन GST नंबर ले सकते हैं।

जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए कितनी फीस देनी होती है?

रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार के द्वारा कोई भी फीस नहीं  ली जाती है आप ऑनलाइन जीएसटी पोर्टल पर जाकर स्वयं भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। हालांकि अगर आप किसी ई मित्र या फिर वकील की सहायता से रजिस्ट्रेशन करवाते हैं तो वह फीस ले सकते हैं हालांकि सरकार के द्वारा इसके लिए कोई भी फीस निर्धारित नहीं है।

जीएसटी के लाभ क्या क्या?

  • घरेलू वस्तुओं जैसे कि दूध, नमक, चीनी अनाज ,इन वस्तुओं पर अब 0%टैक्स लगेगा GSTआने से पहले इन वस्तुओं पर टेक्स्ट लिया जाता था।
  • जीएसटी से पहले टैक्स पर टैक्स देना होता था जैसे कि अगर आप किसी एक राज्य से किसी  उत्पाद को खरीदते हैं तो वहां पर आपको उसके लिए टैक्स देना होता था ,और वही उत्पाद अगर आप दूसरे राज्य में जाकर बेचते  हैं तो वहां पर भी आपको उसके लिए टैक्स देना होता था ।जीएसटी आने के बाद में सिर्फ एक राज्य में ही टैक्स देना होगा  जहां आप उस सामान को बेचेंगे वहीं पर आपको आईजीएसटी देना होगा।
  • GSTआने के बाद सारा कार्य कंप्यूटर से होगा पेपर वर्क नहीं होगा इससे भ्रष्टाचार बहुत कम होगा और जो टैक्स  की चोरी करते थे वह अब नहीं कर पाएंगे।
  • GST आने के बाद अगर किसी उत्पाद का भाव कम होता है तो उसका पूरा पूरा लाभ है एक बड़े व्यापारी को नहीं होकर उपभोक्ताओं को होगा।
  • जीएसटी आने के बाद स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग ज्यादा बढ़ेगा क्योंकि अगर हम किसी उत्पाद को दूसरे देश से आयात करते हैं, तो कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ आईजीएसटी भी देना होगा जिससे वह उत्पाद महंगा हो जाएगा तो इस कारण हम स्वदेशी वस्तुओं का ज्यादा प्रयोग करेंगे तो इसे मेक इन इंडिया सफल होगा।
  • जीएसटी से पूरे देश में एक सम्मान कर प्रणाली विकसित होगी जो भ्रष्टाचार को काफी हद तक कम कर देंगी

जीएसटी के नुकसान

हालांकि जितने जीएसटी के लाभ है उतनी जीएसटी की हानि नहीं है इसके सिर्फ एक ही प्रमुख हानी है कि पहले जो 17 इनडायरेक्ट टैक्स लिए जाते थे, उनको मिला करके जीएसटी बना दिया गया है जिसके कारण राज्यों को इससे राजस्व में घाटा लगेगा इसकी क्षतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा 5 वर्ष में कर दी जाएगी।

GST परिषद क्या है?

GST से सम्बन्धित निर्णय इसी परिषद द्वारा लिए जाते है इसकी संरचना कुछ इस प्रकार है।

  • अध्यक्ष – देश के वित मंत्री
  • राज्य के वित मंत्री ( सदस्य)
  • सभी राज्यो के वित मंत्री (28)
  • केंद्र शासित प्रदेशों (जहां विधानसभा है ) के वित मंत्री इस प्रकार इसमें कुल 33 सदस्य होते है।

आशा करते है कि यह पोस्ट आप के लिए मददगार रहा होगा। और आशा है कि अब आप जीएसटी कितने प्रकार के होते हैं, जीएसटी की आवश्यकता क्या है, कितना कारोबार जीएसटी पंजीकरण के लिए आवश्यक होता है और जीएसटी से जुडी पूरी जानकारी जान गए होंगे। हम आपके सुझावों और योगदान की सराहना करते हैं। अपनी सुझाव देने के लिए नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें जरूर बताइये। शुक्रिया!

FAQ

सबसे पहले GST की शुरुआत कहां हुई?

सबसे पहले GST की शुरुआत फ्रांस में हुई 1954 में।

कौनसी समिति की सिफारिश पर GST लागू किया गया?

केलकर समिति की सिफारिश पर GST लागू किया गया।

राष्ट्रपति द्वारा इसे कब हस्ताक्षर किया गया?

8 सितम्बर 2016 को।

GST लागू कब हुई?

GST 1 जुलाई 2017 को लागू हुई।

किस संविधान संशोधन के तहत GST लागू हुई?

संविधान संशोधन 101 के तहत GST लागू हुई।

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