Domain Name Kya Hota Hai? .in और .com Domain में क्या फर्क होता है?

नमस्कार दोस्तों, Domain Name Kya Hota Hai (What is Domain Name in Hindi) आप दिन में कितनी बार Google Search करते हैं ? क्या आपने कभी सोचा है की जो Websites होते हैं वो कैसे काम करता है? क्या आप जानते हैं की Website का Domain Name Kya Hota Hai? .in और .com Domain में क्या फर्क होता है? तो दोस्तों इस विषय पर आज हम विस्तार रूप से जानेंगे। 

Domain Name Kya Hota Hai?

एक Website का जो नाम होता है उसको ही Domain कहा जाता है।

हर एक Website का 2 पते होते हैं। 

  1. IP Address 
  2. Domain Name

इन दोनों मैं से आप किसी को भी Google अथवा दूसरे Search Engine पर Search करके Website तक पहुंच सकते है। पर जो IP Address होता है वो संख्या के रूप में होता है जो बहत ही जटिल होता है याद करने मैं इस लिए Website को एक पहचान देने के लिए Domain Name रखा जाता है।

आसान भाषा मैं कहा जाए तो जैसे हर एक जगह की 2 पता होता है 1 है उसकी Postal code और दूसरा है उस जगह का नाम। पर उस जगह का पहचान हमेशा उसकी नाम से ही होता है ना की उसकी Postal Code से। ऐसे ही Domain Name भी एक Website का पहचान होता है। 

उदाहरण स्वरूप एक Website है  www.thehindisagar.in यहाँ पर जो “Thehindisagar” है उसे ही Domain Name कहा जाता है। और जो “.in” है उसे Domain Name Extension कहा जाता है।  

आप एक Website को किसी Search Engine पर Search करते हैं और आपको उस Website का Result पाते हैं ये सब जो प्रक्रिया होता है वो DNS (Domain Name System) करता है। 

Domain Name कैसे काम करता है?

Domain Name कैसे काम करता है

जब भी आप किसी Website के URL अथवा Domain Name किसी Browser पे Type कर के Search करते हैं तो यह पहले Server के Global Network को भेजता है जिसे DNS बनाता है। 

फिर Server Domain से जुड़े नाम Sever की तलाश करता है और Server को आपका अनुरोध Forward करता है। 

आपकी Hosting कंपनी आपके अनुरोध को उस Computer जिसे Web Server कहा जाता है वहाँ  पर भेजेगी जहां आपकी Website संगृहीत है।

वो Web Server अब Web Page और उससे जुड़े जानकारी को प्राप्त करेगी और वापस Result के रूप से आपकी उस Data को आपकी Browser पर भेज देगी। 

इस तरह काम करता है Domain Name 

Domain कितने प्रकार के होते हैं और क्या क्या है?

Domain 5 प्रकार के होते हैं 

1.Top-Level Domain (TLD) 

इसे Domain Name Extension भी कहा जाता है। 

Top-Level Domain मैं शामिल है 

  • .com

इसे बणिज्यिक Website के लिए इस्तेमाल किया जाता जाने के लिए बनाया गया था पर अब बणिज्यिक या किसी भी Website मैं इस्तेमाल किया जा रहा है। 

यह दुनिया का सबसे लोकप्रिय Domain Name Extension है। 

  • .net

इसे उन संस्था के Websites के लिए बनाया गया है जो Internet सेवा प्रदान करते हैं पर आजकल हरकोई अपने Websites मैं .net का इस्तेमाल कर सकता है।  

  • .edu

यह सिक्षा के संबंधित Website मैं इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। 

America के siksha संबंधित Website मैं सिर्फ .net इस्तेमाल किया जाता है और दूसरे देशों की Websites मैं उनका Country Code Top-Level Domain के साथ . net इस्तेमाल करते हैं। 

  • .org

इसे गैर-लाभकारी संस्था के Website मैं इस्तेमाल किया जाने के लिए बनाया गया था पर आजकल सभी लाभकारी संस्था,गैर-लाभकारी संस्था स्कूल और समुदाय द्वारा इस्तेमाल हो रहा है।  

  • .mil

इसे America की Military के सभी Website के इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया था और प्रतिबंध के कारण इसे कोई और दूसरा संस्था या समुदाय इस्तेमाल नहीं कर सकता। 

  • .gov 

इसे सरकार की Official Websites मैं इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया था और आज लगभग सभी देशों की सरकारी Website मैं इसे इस्तेमाल किया जा रहा है। 

इस पर भी प्रतिबंध के कारण कोई दूसरा बेसरकारी संस्था या समुदाय इस्तेमाल नहीं कर सकता।

2. Country Code-Top Level Domain (ccLTD) 

इसे किसी एक देश के अंदर ही चलने वाले Websites मैं इस्तेमाल करने के लिए बनाए गए हैं।

कोई अगर अपने Website मैं ccTLD का इस्तेमाल करता है तो कोई दूसरे देश मैं वह Website नहीं खुलेगा। आसान भाषा मैं कहा जाए तो ccTLD लगा देने से जिस देश का लगाया है सिर्फ उस देश मैं ही Website इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबंध लग जाता है।

पृथ्वी के सारी देशों की उनका अपना ccTLD है जैसे की 

  • .cn (सिर्फ China मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • .in (सिर्फ India मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • .uk (सिर्फ United Kingdom मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • .us (सिर्फ उत्तर America मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • .ru (सिर्फ Russia मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • . br (सिर्फ Brazil मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • .eu (सिर्फ European Union मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

  • .it (सिर्फ Italy मैं इस्तेमाल होने वाले Websites के लिए)

ऐसे भिन्न भिन्न देश की ccTLD होते हैं। 

3. Generic Top-Level Domain (gLTD)

यह Top Level Domain अथवा TLD का ही हिस्सा है। उन सब TLD जिन्हे सार्बजनिक रूप से इस्तेमाल करते हैं उसको gTLD कहा जाता है। 

.com, .in, .org आदि सबसे लोकप्रिय gTLD हैं। 

4. Second-Level Domain (SLD)

एक Website की URL मैं जो Subdomain अथवा Third Level Domain और Top Level Domain के बीच मैं होता है उसे Second Level Domain कहा जाता है।

उदाहरण स्वरूप :- www.thehindisagar.in मैं “www” Subdomain है

                     “Hindisagar” Second-Level Domain है और 

                     “.in” Top-Level Domain है   

 

5. Third Level Domain अथवा Subdomain 

हर किसी Website के URL मैं जो “Www” होता है उसे Third Level Domain कहा जाता है। 

Subdomain का इस्तेमाल एक Website को निर्दिष्ट पहचान देने के लिए किया जाता है। इससे Website को एक अलग पहचान मिलता है और URL को देखते ही पता चल जाता है की यह किसी खास चीज का Website है। 

उदाहरण स्वरूप ;- अगर आप एक Plumber सेवा देने के लिए Website बना रहे हैं तो आप अपना Website का नाम “Plumber.example.com’

इसे सबको पता चल जाएगा की ये Website Plumber का सेवा देता है। 

पर Third Level Domain के बिना भी कोई Website Search किया जा सकता है इस लिए Third Level Domain को एक Website URL का अनावश्यक हिस्सा कहा जाता है। 

DNS क्या है ?

DNS Domain Name को IP Address में अनुवाद करता है जिसे कंप्यूटर समझता है।

DNS काम कैसे करता है?

Domain काम कैसे करता है

DNS Internet की Phone Dictionary जैसा काम करता है जहां पर हर एक Website का DNS number अथवा IP Address का Data संग्रक्षित होता है। 

जैसे हमने बताया कि हर एक Website का 2 पता होता है IP Address और Domain Name। 

IP Address कुछ नंबर की से बने होते हैं जैसे की Facebook का IP Address है 69.63.184.142

और आप को पता ही होगा Computer aur Internet सिर्फ नंबर का भाषा ही समझते हैं। इस लिए हर एक Website के एक विशेष नंबर होते हैं जिसे IP Address अथवा DNS नंबर कहा जाता है। 

तो आसान भाषा मैं कहा जाए तो IP Address Computer और Internet पठनीय पता है और Domain Name मानव पठनीय पता है। 

जब कोई उपयोगकर्ता Browser में एक Website Search करता है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम का DNS स्थानीय Cache में जानकारी की जांच करता है।  यदि अनुरोधित पता नहीं मिलता है तो यह LAN(Local Area Network) में एक Domain Name System Server की तलाश करेगा।जब LAN के DNS Server में अनुरोधित Domain Name मिल जाता है, तो यह परिणाम लौटा देगा।

उदाहरण स्वरूप आप facebook.com का Search करते हैं तो DNS facebook.com की DNS नंबर अथवा IP Address को अपने Data server में खोजेगा। जब Facebook.com से संबंधित IP Address मिल जाता है तो उसको Process करके परिणाम आपके Device पर भेज देगा। 

आप भी अपने खुद की Website के लिए Domain खरीद सकते है। अगर आप किसी नाम से Domain बना ले तो उस नाम से कोई दूसरा Domain नहीं बन पाएगा। 

Domain कहां से खरीद सकते हैं?

बहत सारी Website हैं जो आपके हिसाब से Domain बनाता और बेचता है। 

उसमे से कुछ लोकप्रिय Website हैं

  1. Bluehost
  2. Neamcheap
  3. GoDaddy
  4. Hostinger
  5. Hostpapa
  6. Network solutions
  7. Squarespace

इन सब Website से अपना मनपसंद Domain खरीद सकते है। 

जब आप Domain खरीदते या बनाते हैं तो बहत सारे विकल्प दिया जाता है Domain extension के। 

जैसे की .Com, .in तो इन दोनो मैं फर्क क्या है ? आओ जानते हैं। 

in और .com Domain में क्या फर्क होता है?

.com क्या है?

.Com सबसे आम और सबसे अधिक मान्यता प्राप्त Domain Extension है। अगर आप अपने Website में .com का इस्तेमाल करते हैं तो दुनिया के किसी भी देश में आपका Website खोला जा सकता है। 

यह ज्यादातर वाणिज्यिक Websites के द्वारा उपयोग किया जाता है। हालांकि, जो कोई भी Domain Name पंजीकृत करना चाहता है, वह .com में समाप्त होने वाले नाम को पंजीकृत कर सकता है चाहे वो Website वाणिज्यिक उद्देश्य मैं हो या ना हो। 

.in क्या है ?

अगर आप चाहते हैं की आप का Website सिर्फ भारत मैं ही ब्यबहार किया जाए तो आप अपने Website के लिए .in Domain extension ले सकते हैं। 

अपने Website pe .in लगा देने से वह सिर्फ भारत मैं उपयोग्य Website बन जायेगा और अगर भारत के बाहर कोई Website खोलना चाहता है तो वो नही खोल पाएगा। 

FAQ

DNS ka full form kya hai

DNS ka full form (Domain Name System) डोमेन नेम सरवर होता है।

Domain Names का जो Process है उसे कौन चलता है ?

Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN) नामक एक गैर-लाभकारी संगठन DNS प्रबंधन,IP Address आवंटन, और Namespace से संबंधित Database के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है – यह सब उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुसार है।

कोई भी व्यवसाय के लिए Domain लेना क्यों फायदेमंद होता है ?

एक Domain Name आपके व्यवसाय को World Wide Web पर विश्वसनीयता और एक विशिष्ट पहचान देता है और दुनिया की किसी भी देश से कोई भी आप के व्यवसाय के वारे मैं जान सकता है। 

निष्कर्ष

आप कितनी आसानी से Internet पे कुछ Search कर के पा लेते हैं पर जो भीतर का Process होता है वो हम सबकी सोच से बहत ही जटिल होता है। 

आज के जमाने का ये उच्च कोटि की Technology ही है जिसके मदद है इतने जटिलता होने के बाबजूद हम कोई भी चीज Search करने पर कुछ ही Seconds में Result मिल जाता है। 

उम्मीद करते है ये पोस्ट Domain Name Kya Hota Hai? .in और .com Domain में क्या फर्क होता है? के वारे मैं समझने में मददगार रहा। अगर पोस्ट पसंद आया तो Comments जरूर करें और दोस्तों मैं Share करना ना भूलें धन्यवाद। 

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