साइकिल का आविष्कार किसने किया था और कब किया था? Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya Tha? भारत में साइकिल कब आई

परिवहन का हमारे जीवन में क्या महत्व है, उसे शायद किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। अगर हम इसके महत्व को शब्दो में बांधने की कोशिश करते है तो ये इसके लिए अतिश्योक्ति होगी। सबसे पहले परिवहन के साधन के रूप में साइकिल का उपयोग ही किया गया था। हालांकि आजकल अन्य परिवहन के साधनों के विकास के कारण साइकिल का महत्ता कम हुई है। लेकिन फिर भी इसके योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। तो चलिए देखते है कि साइकिल का आविष्कार किसने किया? और भी इसके बारे में जानकारी।

साइकिल का आविष्कार किसने किया? Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya Tha?

साइकिल की बात करे तो इसका अविष्कार बहुत सारे प्रयासों के वाद हुआ था, पहले चार पहियों वाला साइकिल बनाया गया था फिर उसके बाद नए नए टाइप के साइकिल बनते गए। जैसे की दो पहियों वाले और गियर वाले साइकिल। तो चलिए देखते हैं की किन किन की प्रयासों से और कितने प्रयासों के बाद हम जो चलते मतलब अभी के समय के साइकिल बन पाया। 

पहला प्रयास

Giovanni Fontana नामक इटली के इंजिनियर ने पहली बार चार पहियो वाली साइकिल बनाई थी। क्योंकि इसे चलाने में कोई बाधा ना आए इसलिए इन्होंने इसे चार पहियों वाली बनाया। ताकि इसे आसानी से चलाया जा सके। गिरने का खतरा ना हो। लेकिन अगले 400 सालों तक इसपर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। 

दूसरा प्रयास

400 साल बाद 1813 में एक जर्मन इनवेंटर Karl Freiherr Von Drais ने साइकिल बनाई। 1817 में इन्होंने 2 पहियों कि साइकिल बनाई। युरोप में इसे Hobby Horse के नाम से जाना गया था। इस साइकिल की सबसे बड़ी कमी थी कि इसे पेरो से धकेलना पड़ता था। जो कि काफी थकाने वाला था। लेकिन फिर भी उस साइकिल को काफी पसंद किया गया। क्योंकि उस समय यही एकमात्र साधन था। भले ही थकाने वाला क्यों ना हो।

तीसरा प्रयास

Kirkpatrick MacMillan स्कॉटलैंड के लुहार थे इन्होंने जो साइकिल पेरो से धकेली जाती थी उसकी समस्या को समाप्त करने के लिए पेडल का आविष्कार किया। इनकी पूरी साइकिल लकड़ी की बनी हुई थी लेकिन क्योंकि ये एक लुहार थे इसलिए उन्होंने पहियों की मजबूती के लिए लोहे का उपयोग किया। इन्होंने इस साइकिल को और भी बेहतर करने के लिए उसमे एक स्टेरिंग भी लगाया जिससे कि साइकिल का संतुलन बनाया जा सके। इन्होंने इस साइकिल में बहुत अधिक मात्रा में लोहे और अन्य वस्तुएं लगा दी जिससे इसका वजन काफी बढ़ गया और इसे चलना काफी मुश्किल हो गया। ऐसा कहा जाता है कि इनके द्वारा बनाई गई साइकिल का वजन 26 kg हो गया था।

चोथा प्रयास

1870 तक आते आते साइकिल पूरी तरह से धातु के फ्रेम में आने लगी थी। और साइकिल के टायर में रबर का उपयोग किया जाने लगा था। 1870-80 तक जो इस प्रकार की साइकिल बनाई गई उनको Penny Farthing कहा गया था। लेकिन इस प्रकार की साइकिल में भी एक कमी थी कि इसका पहला पहिया बहुत बड़ा और दूसरा पहिया बहुत छोटा था। इससे काफी दुर्घटना होती थी। और इसके पेडल भी आगे के टायर से जुड़े होते थे। जिससे इसकी चलाने में काफी मुश्किल होती थी।

पांचवा प्रयास

1880 में John Kemp Starley ने एक साइकिल बनाया जिसे सुरक्षा के लहजे से बनाया गया था। इसके दोनों पहिए समान थे। और इसके पेडल आगे के पहिए से ना जुड़कर पीछे के पहिए से जुड़ा था।

इस प्रकार इनके द्वारा बनाई गई साइकिल काफी सफल साइकिल थी। इसकी चलाने में कोई मुश्किल नहीं थी, 1920 तक आते आते बच्चो के लिए भी साइकिल आने लगी क्योंकि साइकिल अब इतनी सुरक्षित बन चुकी थी कि इसका उपयोग बच्चो द्वारा भी लिया जा सकता था।

1960 के बाद साइकिल में जैसे जैसे सुधार होता गया तकनीकी की प्रगति का प्रभाव साइकिल पर भी पड़ा तो साइकिल का उपयोग रेसिंग में भी होने लगा

रेसिंग के लिए अलग प्रकार की साइकिल बनाई गई है। जिनकी पूरी सरंचना रेसिंग की भांति ही बनाई जाती है। इनमे गीयर भी दिया गया है।

अब जैसे जैसे तकनीक बढ़ती जा रही साइकिल के भीं अलग अलग प्रकार आते जा रहे है। अब इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई जा रही है। जिनमे पेडल की कोई आवश्यकता नहीं होती ये इलेक्ट्रिक साइकिल बैटरी से काम करती है। इनमे ट्रैकर भी लगाया जाता है जो कि सुरक्षा की नजर से काफी अच्छा होता है।

इस प्रकार हम देखते है कि साइकिल बनाने में किसी एक वैज्ञानिक का योगदान नहीं है। इस साइकिल को बनाने में बहुत सारे वैज्ञानिक का महतवपूर्ण योगदान है।

हम किसी एक वैज्ञानिक को इसका श्रेय नहीं दे सकते। हालांकि पहले जिन वैज्ञानिकों ने साइकिल बनाई उनमें काफी कामिया थी लेकिन अगले वैज्ञानिक ने उस कमी को दूर करके एक बेहतर साइकिल बनाई। और इसका परिणाम हम वर्तमान की साइकिल की रूप में देख रहे है। किसी भी आविष्कार में किसी एक वैज्ञानिक का योगदान नहीं होता बल्कि बहुत सारे वैज्ञानिकों का महतवपूर्ण समय और योगदान होता है। लेकिन हम उसी वैज्ञानिक को आविष्कार का श्रेय दे देते है जिन्होंने एक सफल आविष्कार किया है। 

भारत में साइकिल कब आई?

भारत में पहली बार साइकिल 1942 में आई थी। जो की हिन्द कंपनी की थी। 

साइकिल कितने प्रकार की होती है?

एमटीवी साइकिल 

इस साइकिल के दोनों टायर बहुत मोटे मोटे होते है। इसको आप उबड़ खाबड़ सड़को पर भी चला सकते है। इसमें आगे सोकर और डिस ब्रिक भी आते है।

हाइब्रिड साइकिल 

ये साइकिल ऑफ रोड और ऑन रोड दोनों पर चलती है। लेकिन बहुत जायदा खराब सड़क पर ये नहीं चलती है। ये एमटीवी साइकिल की तुलना में जायदा स्पीड होती है और जायदा स्मूथ चलती है। इसलिए ये साइकिल एमटीवी साइकिल की तुलना में ज्यादा महंगी होती है।

रोड या सिटी बाइक

इस साइकिल के टायर एमटीवी और हैब्रिड साइकिल की तुलना में काफी पतले होते है। ये साइकिल केवल रोड पर ही चलती है। खराब सड़क पर इसकी रिम भी मूड सकती है। इस साइकिल का उपयोग रेसर द्वारा किया जाता है। ये साइकिल काफी हल्की होती है, ओर इसकी स्पीड काफी जायदा होती है।

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निष्कर्ष 

इस आर्टिकल को पढ़कर आज आपको यह जानकारी प्राप्त हुई की साइकिल का आविष्कार किसने किया था? साइकिल की जो वर्तमान स्थिति हम देखते हैं, और वर्तमान में जिन साइकिल का हम उपयोग करते हैं उनको इस स्थिति में पहुंचाने के लिए कितने वैज्ञानिकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है? और एक सफल साइकिल किस वैज्ञानिक के द्वारा बनाई गई थी? साइकिल कितने प्रकार की होती है? यह भी हमने इस आर्टिकल में आपको बताया। और भी साइकिल के बारे में जुड़े अन्य रोचक तथ्य हमने आपको इस आर्टिकल में बताने की पूरी पूरी कोशिश की है।

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FAQ

साइकिल का हिंदी नाम क्या है?

साइकिल का हिंदी नाम द्विचक्रिका, दिव्चक्र वाहिनी है।

भारत में साइकिल कब आई?

भारत में पहली बार साइकिल 1942 में आई थी।

भारत में पहली बार किस कंपनी की साइकिल आई?

भारत में पहली बार साइकिल हिन्द कंपनी की आई थी।

साइकिल शब्द कौन सी भाषा का शब्द है?

साइकिल शब्द ब्रेटजैल के एक संस्करण जर्मन शब्द प प्रेटजैल से लिया गया है।

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