6 मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं? तथा मौलिक अधिकारों का विवरण

हमारे देश में कानून और संविधान है, इसी संविधान से जुड़ी मौलिक अधिकार के विषय में आज हम यह लेख लिखेंगे, यह एक सामान्य ज्ञान है जिसे सभी को पता होना चाहिए. हमारे देश में कई संविधान, कानून बनाये गये है, उसी के अंतगर्त मौलिक अधिकार भी है. 6 मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं यह जानने से पहले यह पता होना चाहिए मौलिक अधिकार क्या है? तो चलिए आपको मौलिक अधिकार की सारी जानकारी देते हुए 6 मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं यह सब इस आर्टिकल में आपको बतायंगे।

मौलिक अधिकार क्या होता है?

जो लोगो के जीवन के लिए अति आवश्यक या मौलिक समझे जाते है उन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है, इसे मूल अधिकार भी कहा जाता है और अंग्रेजी में इसे fundamental rights कहा जाता है। मूल अधिकार एक लोकतांत्रिक देश में व्यक्ति के सर्वगीण विकास के लिए आवश्यक होता है। मौलिक अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 वणित भारतीय नागरिको को प्रदान किये गये वे अधिकार है जो सामन्य स्थति में सरकार द्वारा सीमित नही किये जा सकते है और जिनकी सुरक्षा का प्रहरी सर्वेच्य न्यायालय है।

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6 मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं?

निम्नलिखित 6 मौलिक अधिकार है:

  1. समानता का अधिकार।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार।
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार।
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार।
  5. संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार।
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

6 मौलिक अधिकारों का विवरण:

इस 6 मौलिक अधिकार के बारे में आपको विस्तार से पुरे 6 अधिकारो की जानकारी देंगे:

1.समानता का अधिकार:

इस अधिकार का अर्थ है देश के कानून के सामने सभी नागरिको के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए और लिंग जाती धर्म या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार को त्याग देना चाहिए। इसके कुछ निम्न अधिकार इस तरह है:

  • सार्वजानिक रोजगार में अवसर की समानता।
  • धर्म,जाति,लिंग की समानता।
  • अस्पर्श्यता का उन्मूलन और इस प्रथा का निशेथ।

2.स्वतंत्रता का अधिकार:

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 से लेकर 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया गया है। संविधान में स्वतंत्रता के अधिकार का स्थान भारतीय संविधान का उद्देश्य अभिव्यक्ति,विश्वास,धर्म और उपासना की स्वाधीनता सनिश्चित करना है। भारत में प्रत्येक नागरिक को भारत में कही भी रहने या बीएस जाने की स्वतंत्रता है, अस्त्र शस्त्र रहित और शांतिपूर्ण सम्मेलन की स्वतंत्रता है, समुदाय और संघ निर्माण की स्वतंत्रता है, व्यवसाय की स्वतंत्रता है।  इस तरह भारत को स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त हुआ।

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इसके अधिकार कुछ इस तरह है:

  • भाषण का अधिकार।
  • हथियारों के बिना शान्ति से सभा करने का अधिकार।
  • संगठन बनाने का अधिकार।
  • देश में किसी भी हिस्से में निवास करने का अधिकार। 
  • कोई भी व्यापार या व्यवसाय करने का अधिकार।

3.शोषण के विरुद्ध अधिकार:

इस संविधान के अंतग्रत शोषण के विरुद्ध मौलिक अधिकार है. शोषण के विरुद्ध अधिकार की खरीदी बिक्री बेगारी तथा बाल श्रम जैसे 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो को बाल मजदूरी जैसे कारखानों जैसी अन्य जोखिम भरे कार्य करवाना क़ानून अपराध है। इसके मुख्य अधिकार:

  • देह व्यप्पर और भीख मंगवाने और इस प्रकार के अन्य जबरदस्ती वाले काम कराने का निषेध है।
  • कारखानों में बाल मजदूर पर प्रतिबन्ध।
  • मानव के अवैध व्यापार और जबरन मजदूरी कराने का निषेध।

4.धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार:

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25-28 में है. यह समस्त नागरिको को किसी भी धर्म में विश्वास रखने तथा अपनी पसंद अनुसार उपासना करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है.बी आसन भाषा में कहे तो धार्मिक स्वतंत्रता का अर्थ हैं किसी भी धर्म को अपनाना, अपने धर्म का प्रचार प्रसार करने का अधिकार होना, दान देने का अधिकार होना. इसका जीके भारतीय संविधान के भाग-3 में किया गया है. इसके कुछ मुख्य अधिकार इस प्रकार है;

  • मान्यता और पेशा चयन, धर्म चयन और इसके प्रचार की स्वतंत्रता।
  • धार्मिक कर्म के प्रबंध की स्वतंत्रता।
  • शिक्षण संस्थानों के धार्मिक शिक्षा या पूजा में भाग लेने की स्वतंत्रता।

5.संस्कृति व शिक्षा का अधिकार:

इस अनुछेद के अनुसार देश के सभी नागरिको को संस्कृति व शिक्षा सम्बन्धी स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है. नागरिको के प्रत्येक वर्ग को अपनी भाषा,लिपि व संस्कृति को सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार है। सरकारी नागरिक को धर्म,जाती या भाषा के आधार पर मना नही कर सकते।

6.संवैधानिक उपचारों का अधिकार:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत संवैधानिक उपचार का अधिकार एक मूल अधिकार है जो व्यक्तियों को संवेधानिक रूप से संरक्षित अन्य मौलिक अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का विशेषाधिकार प्रदान किया है। अगर व्यक्ति के किसी भी अधिकार का हनन होता है तो वो सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है इन संवैधानिक उपचारों को लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कह सकता है।

निष्कर्ष: 6 मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं?

इस तरह हमारे देश में इस 6 मौलिक अधिकार साहयतापूर्वक इस देश का संविधान है। यह अधिकार हर नागरिक के हाथ में होता है और तो और अगर किसी भी नागरिक को उसका हक़ अगर नही मिलता है तो वह सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है वह एक अधिकार भी व्यक्ति के लिए बहुत ही साहयतापूर्वक है. जब कोर्ट में यह नोटिस जाती है निचली अदालत ने या कोई सरकारी अधिकारी ने बिना अधिकार के कोई कार्य किया है तो कोर्ट ऐसे फाइल के केसेस को सीधे उपरी अदालत में उत्पेषित कर देती है। तो ऐसे ही यह मौलिक अधिकार हमारे देश की रक्षा करते है।

FAQ:

6 मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं?

1. समानता का अधिकार।
2. स्वतंत्रता का अधिकार।
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार।
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।
5. संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
6. संस्कृति और शिक्षा का अधिकार।

मौलिक अधिकार कब लागू हुआ?

26 जनवरी 1950

भारत का संविधान लिखने वाला कोन है?

प्रेम बिहारी नारायण रायजादा।

भारत में कुल कितने धाराएँ है?

511

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